Ghar Par Mulethi Ki Jad Ugane Ka Aasan Tarika In Hindi: मुलेठी की जड़ को आयुर्वेद में एक अमृत समान औषधि माना गया है, जो खांसी, गले की समस्या, पाचन और इम्युनिटी बढ़ाने में बेहद फायदेमंद होती है। आमतौर पर यह हमें सूखी अवस्था में बाजार से मिलती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुलेठी की जड़ को घर पर भी उगाया जा सकता है। सही मिट्टी, धूप और थोड़ी नियमित देखभाल से आप अपने घर के गमले या गार्डन में शुद्ध और ताज़ी मुलेठी उगा सकते हैं। घर पर उगाई गई मुलेठी न सिर्फ रसायन-मुक्त होती है, बल्कि इसकी क्ववालिटी भी बेहतर होती है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि, मुलेठी का पौधा घर पर कैसे उगाएं/लगाएं, मिट्टी में मुलेठी की जड़ लगाने की विधि क्या है और Licorice के पौधे की देखभाल कैसे करें, ताकि आपको अच्छी और स्वस्थ पैदावार प्राप्त हो सके।
मुलेठी का पौधा क्या है – What Is Licorice Plant In Hindi
यह एक बहुवर्षीय औषधीय पौधा है, जिसकी जड़ का उपयोग आयुर्वेद में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसकी जड़ मीठे स्वाद वाली होती है और खांसी, गले की खराश, पेट की समस्याओं व इम्युनिटी बढ़ाने में लाभकारी मानी जाती है। मुलेठी का पौधा धीरे-धीरे बढ़ता है और इसकी जड़ जमीन के अंदर फैलती है। सही परिस्थितियां मिलने पर इसे घर पर गमले या बगीचे की मिट्टी में उगाया जा सकता है। यह पौधा लंबे समय तक जीवित रहता है और एक बार जम जाने पर सालों तक जड़ देता रहता है।
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मुलेठी उगाने के लिए बेस्ट मिट्टी – Best Soil For Growing Licorice In Hindi
मिट्टी में मुलेठी के पौधे की जड़ अंदर तक फैलती हैं, इसलिए मिट्टी का प्रकार उसकी वृद्धि और जड़ की गुणवत्ता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए हल्की, भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी में थोड़ी रेत मिलाने से जल निकासी अच्छी रहती है और जड़ें सड़ती नहीं हैं। इसके साथ ही गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट मिलाने से पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता है। भारी, गीली या जलभराव वाली मिट्टी मुलेठी के लिए नुकसानदेह होती है, क्योंकि इससे जड़ कमजोर और रोगग्रस्त हो सकती है। सही मिट्टी, मुलेठी के लंबे समय तक स्वस्थ रहने और औषधीय गुणों वाली जड़ देने में मदद करती है।
मुलेठी घर पर उगाने की आसान स्टेप्स – Easy Steps To Grow Licorice Plant At Home In Hindi
मुलेठी की जड़ अपने औषधीय गुणों के लिए बहुत पॉपुलर है और इसे घर पर उगाना भी संभव है। नीचे दिए गए स्टेप्स से इसे बहुत आसानी से उगाया जा सकता है, जो कि निम्न हैं—
1. सही जगह सेलेक्ट करें (Location Selection)
मुलेठी उगाने के लिए ऐसी जगह चुनना जरूरी है जहां पर्याप्त धूप मिले। इसे रोज़ कम से कम 5–6 घंटे की हल्की धूप पसंद होती है। बहुत तेज धूप या पूरी छांव दोनों ही इसके लिए सही नहीं होतीं। घर की छत, बालकनी या गार्डन का ऐसा हिस्सा सबसे अच्छा रहता है जहां हवा का संचार भी बना रहे। खुले स्थान में पौधा ज्यादा अच्छा बढ़ता है और जड़ें भी स्वस्थ बनती हैं। सही जगह चुनने से पौधा मजबूत होता है और जड़ का विकास बेहतर होता है।
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2. मिट्टी की तैयारी (Soil Preparation)
मुलेठी की जड़ अच्छी तरह बढ़े, इसके लिए मिट्टी का भुरभुरा और उपजाऊ होना बहुत जरूरी है। भारी या सख्त मिट्टी में जड़ें ठीक से फैल नहीं पातीं। मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट और थोड़ी रेत मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इससे जल निकास अच्छा रहेगा और जड़ों को बढ़ने में आसानी होगी। मिट्टी का पीएच सामान्य से थोड़ा क्षारीय होना बेहतर माना जाता है। अच्छी मिट्टी होने पर मुलेठी की जड़ मोटी और गुणवत्ता वाली बनती है।
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3. बीज या जड़ का सेलेक्शन (Seed or Root Selection)
मुलेठी को बीज या जड़ के टुकड़ों दोनों से उगाया जा सकता है, लेकिन जड़ से उगाना ज्यादा आसान और सफल होता है। स्वस्थ और रोगमुक्त जड़ का छोटा टुकड़ा लें, जिसमें गांठ या अंकुर मौजूद हो। बीज से उगाने में ज्यादा समय लगता है और अंकुरण भी कम होता है। जड़ से उगाने पर पौधा जल्दी जम जाता है और बढ़वार भी अच्छी होती है। इसलिए शुरुआती लोगों के लिए जड़ से मुलेठी उगाना बेहतर विकल्प है।
4. सही गमला होना जरूरी (Pot Selection)
मुलेठी की जड़ जमीन के अंदर फैलती है, इसलिए गमला या ग्रो बैग गहरा और चौड़ा होना चाहिए। कम से कम 12–15 इंच गहराई वाला गमला चुनें, ताकि जड़ों को फैलने की जगह मिल सके। गमले के नीचे जल निकास के छेद होना बहुत जरूरी है। बहुत छोटे गमले में पौधा कमजोर रह जाता है और जड़ का विकास ठीक से नहीं हो पाता। सही गमला चुनने से पौधा लंबे समय तक स्वस्थ रहता है और अच्छी जड़ प्राप्त होती है।
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5. रोपाई का तरीका (Planting Method)
जड़ का टुकड़ा मिट्टी में लगभग 5–7 सेंटीमीटर गहराई पर लगाएं और ऊपर से हल्की मिट्टी डाल दें। रोपाई के बाद हल्का पानी दें ताकि मिट्टी बैठ जाए। ध्यान रखें कि जड़ पूरी तरह मिट्टी से ढकी हो। रोपाई के बाद कुछ दिनों तक मिट्टी को नम बनाए रखें, लेकिन ज्यादा पानी न दें। सही तरीके से रोपाई करने पर कुछ ही हफ्तों में पौधा जमीन के ऊपर बढ़ने लगता है।
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6. सिंचाई का सही तरीका (Watering Schedule)
मुलेठी को ज्यादा पानी पसंद नहीं होता। जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ सड़ सकती है। मिट्टी सूखने पर ही पानी दें। गर्मियों में सप्ताह में 2–3 बार हल्की सिंचाई पर्याप्त होती है, जबकि सर्दियों में पानी कम देना चाहिए। जलभराव से बचना बहुत जरूरी है। सही सिंचाई से जड़ें मजबूत बनती हैं और पौधा स्वस्थ रहता है।
7. खाद और पोषण (Fertilizer Management)
मुलेठी को बहुत ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती। हर 1–2 महीने में गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट डालना पर्याप्त रहता है। रासायनिक खाद का ज्यादा उपयोग न करें, क्योंकि यह जड़ की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। जैविक खाद से पौधा धीरे-धीरे पोषण लेता है और जड़ का विकास अच्छा होता है। संतुलित पोषण से जड़ मोटी और औषधीय गुणों से भरपूर बनती है।
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8. रोग और कीट से बचाव (Pest and Disease Control)
मुलेठी के पौधे में आमतौर पर कीट कम लगते हैं, लेकिन ज्यादा नमी होने पर फंगल रोग हो सकते हैं। पौधे के आस-पास सफाई रखें और जलभराव न होने दें। यदि पत्तियों पर कीट दिखें तो नीम तेल का हल्का छिड़काव करें। रसायनिक दवाओं से बचें, ताकि जड़ पूरी तरह सुरक्षित और औषधीय बनी रहे।
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9. जड़ की खुदाई और उपयोग (Harvesting and Use)
मुलेठी की जड़ तैयार होने में लगभग 2–3 साल का समय लेती है। जब पौधा पूरी तरह विकसित हो जाए और पत्तियां सूखने लगें, तब जड़ निकाल सकते हैं। खुदाई सावधानी से करें ताकि जड़ टूटे नहीं। निकाली गई जड़ को साफ करके सुखाया जाता है और फिर उपयोग में लाया जाता है। घर पर उगाई गई मुलेठी शुद्ध, ताज़ी और औषधीय गुणों से भरपूर होती है।
मुलेठी की अच्छी पैदावार पाने के लिए जरूरी बातें – How To Increase Licorice Yield In Hindi
अच्छी पैदावार पाने के लिए केवल मुलेठी का पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सही मिट्टी, पोषण, सिंचाई और देखभाल पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। कुछ महत्वपूर्ण बातों का पालन करके मुलेठी की जड़ों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।
- पर्याप्त धूप और खुली जगह: मुलेठी का पौधा अच्छे विकास के लिए रोजाना कम से कम 5–6 घंटे की धूप चाहता है। छायादार या अंदर रखने से जड़ कमजोर और औषधीय गुण कम हो सकते हैं।
- हल्की और भुरभुरी मिट्टी: मिट्टी में हल्की रेत और कम्पोस्ट मिलाकर उसे भुरभुरा बनाना जरूरी है। इससे जड़ों को फैलने की जगह मिलती है और जल निकास भी बेहतर होता है।
- नियमित और संतुलित सिंचाई: मुलेठी को अधिक पानी पसंद नहीं है। मिट्टी हल्की नम रखकर समय-समय पर पानी देना चाहिए। जलभराव से जड़ सड़ सकती है।
- संतुलित खाद और पोषण: मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट डालने से पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता है। रासायनिक खाद का अत्यधिक प्रयोग जड़ की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
- स्वस्थ बीज या जड़ का चयन: पैदावार और पौधे की मजबूती के लिए हमेशा रोगमुक्त और ताज़ा बीज या जड़ ही इस्तेमाल करें। कमजोर या पुरानी जड़ से पौधा कमजोर होगा।
- कीट और रोग नियंत्रण: पौधे की नियमित जांच करें। यदि पत्तियों या जड़ों में कीट या फंगल रोग दिखाई दें तो तुरंत नीम तेल या जैविक उपाय से नियंत्रण करें।
- अधिक रसायन से बचाव: ज्यादा कीटनाशक या रासायनिक खाद से पौधे को नुकसान हो सकता है। जैविक और प्राकृतिक तरीके अपनाना बेहतर है।
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निष्कर्ष:
मुलेठी की जड़ को घर पर उगाना थोड़ा धैर्य और सही देखभाल जरूर मांगता है, लेकिन यह प्रक्रिया कठिन नहीं है। सही जगह, भुरभुरी उपजाऊ मिट्टी, संतुलित सिंचाई और जैविक खाद का नियमित प्रयोग करके कोई भी व्यक्ति अपने घर में मुलेठी का पौधा सफलतापूर्वक उगा सकता है। समय के साथ पौधा मजबूत होता है और उसकी जड़ औषधीय गुणों से भरपूर बनती है। ऐसे ही उपयोगी गार्डनिंग लेख पढ़ने के लिए organicbazar.net पर विजिट जरूर करें।
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