मानसून गार्डनिंग की 10 आम गलतियां, जो पौधों को नुकसान पहुंचा सकती हैं – Common Monsoon Gardening Mistakes In Hindi

Rainy Gardening Mistakes In Hindi: मानसून का मौसम गार्डनिंग के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है, क्योंकि इस दौरान पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है और उनकी वृद्धि तेज हो जाती है। लेकिन कई बार गार्डनर्स अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो पौधों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। अधिक पानी देना, गमलों में जलभराव होना, खरपतवार बढ़ने देना, गार्डन की सफाई में लापरवाही और पौधों की नियमित जांच न करना मानसून में होने वाली कुछ आम गलतियां हैं।

ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि बरसात/मानसून गार्डनिंग में की जाने वाली आम गलतियां कौन सी हैं और रैनी गार्डन में की जाने वाली गलतियों से कैसे बचें। यदि आप चाहते हैं कि आपके पौधे पूरे बारिश के मौसम में स्वस्थ और हरे-भरे बने रहें, तो इन गलतियों से बचना जरूरी है। चलिए जानते हैं, मानसून गार्डनिंग में की जाने वाली आम गलतियां और उनसे बचने के सही तरीकों के बारे में।

मानसून गार्डनिंग में की जाने वाली आम गलतियां – Common Rainy Gardening Mistakes In Hindi

बरसात में पौधों की बढ़वार तो तेज होती है, लेकिन देखभाल में की गई छोटी-छोटी गलतियां जलभराव, जड़ सड़न, फंगल रोग और कीटों की समस्या बढ़ा सकती हैं। इसलिए इन आम गलतियों को पहचानना और समय रहते उनसे बचना स्वस्थ और हरे-भरे गार्डन के लिए बेहद जरूरी है।

1. जरूरत से ज्यादा पानी देना (Overwatering)

जरूरत से ज्यादा पानी देना (Overwatering)

बारिश के मौसम में सबसे आम गलती पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी देना है। कई लोग रोजाना पानी देने की आदत को मानसून में भी जारी रखते हैं, जबकि मिट्टी पहले से ही नम होती है। यदि गमले की मिट्टी लगातार गीली रहती है, तो जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती। इससे जड़ें कमजोर या खराब हो सकती हैं और पौधे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। पानी देने से पहले मिट्टी को चेक जरूर करें। यदि ऊपरी मिट्टी नम महसूस हो रही है, तो पानी देने से बचें।

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2. गमलों में जलभराव होने देना (Poor Drainage)

गमलों में जलभराव होने देना (Poor Drainage)

मानसून में कई बार गमलों के नीचे पानी जमा हो जाता है या ड्रेनेज होल बंद हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकल पाता। जब जड़ों के आस-पास लंबे समय तक पानी जमा रहता है, तो मिट्टी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और जड़ें सड़ने लगती हैं। इसलिए समय-समय पर गमलों के ड्रेनेज होल की जांच करें। यदि जरूरत हो तो गमलों को स्टैंड, ड्रेनेज मैट या ईंट पर रखें, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से निकल सके और पौधा स्वस्थ रहे।

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3. पौधों की नियमित जांच न करना (Ignoring Plant Health)

पौधों की नियमित जांच न करना (Ignoring Plant Health)

बारिश के मौसम में पौधों की ग्रोथ तेज होती है, लेकिन इसी समय कीट और रोग भी तेजी से फैल सकते हैं। कई गार्डनर्स तब तक ध्यान नहीं देते, जब तक समस्या बड़ी न हो जाए। सप्ताह में कम से कम दो बार पौधों की पत्तियों, नई टहनियों और तनों की जांच जरूर करें। यदि किसी पत्ती पर धब्बे दिखाई दें, पत्तियां पीली होने लगें या कीट नजर आएं, तो तुरंत जैविक उपाय अपनाएं।

4. जरूरत से ज्यादा खाद डालना (Over Fertilizing)

जरूरत से ज्यादा खाद डालना (Over Fertilizing)

कई लोग सोचते हैं कि बारिश के मौसम में पौधे तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा खाद की जरूरत होगी। लेकिन जरूरत से ज्यादा खाद देना भी सही नहीं है। मानसून में पौधे पहले से ही सक्रिय रूप से बढ़ रहे होते हैं। ऐसे में अत्यधिक खाद देने से पौधों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। हर 15 से 20 दिन में सीमित मात्रा में जैविक खाद जैसे वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट खाद या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद देना पर्याप्त रहता है। इसके अलावा इस बात का ध्यान भी रखें कि पौधे की मिट्टी न बहे, नहीं तो इससे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।

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5. खरपतवार को नजरअंदाज करना (Ignoring Weeds)

बारिश के मौसम में खरपतवार बहुत तेजी से उगते हैं। कई बार गार्डनर्स केवल मुख्य पौधों पर ध्यान देते हैं और खरपतवार को बढ़ने देते हैं। यदि खरपतवार को समय पर नहीं हटाया जाए, तो वे मिट्टी से पानी और पोषक तत्व लेने लगते हैं। इससे मुख्य पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। सप्ताह में एक बार गार्डन की सफाई करें और खरपतवार को गार्डनिंग टूल्स की मदद से जड़ सहित निकालें।

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6. पौधों को बहुत पास-पास लगाना (Overcrowding Plants)

मानसून में पौधों की शाखाएं और पत्तियां तेजी से बढ़ती हैं। यदि पौधे बहुत पास-पास लगे हों, तो उनके बीच हवा का प्रवाह कम हो जाता है। अधिक नमी और कम वायु संचार कई पौधों में फंगल समस्याओं की संभावना बढ़ा सकता है। पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त शाखाओं की हल्की प्रूनिंग करें।

7. सूखी और रोगग्रस्त पत्तियां न हटाना (Not Removing Damaged Leaves)

सूखी और रोगग्रस्त पत्तियां न हटाना (Not Removing Damaged Leaves)

बारिश के दौरान कई पत्तियां पीली, सूखी या खराब हो सकती हैं। यदि इन्हें पौधे पर ही छोड़ दिया जाए, तो ये रोग और कीट फैलने का कारण बन सकती हैं। पौधों की नियमित सफाई करें और खराब पत्तियों व ब्रांचेस को हटाते रहें। इससे पौधे अपनी ऊर्जा नई और स्वस्थ वृद्धि पर खर्च कर पाते हैं, जिससे पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है।

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8. गमलों को लगातार तेज बारिश में छोड़ देना (Keeping Pots in Heavy Rain)

गमलों को लगातार तेज बारिश में छोड़ देना (Keeping Pots in Heavy Rain)

बारिश का पानी पौधों के लिए लाभदायक होता है, लेकिन लगातार कई दिनों तक होने वाली भारी बारिश कुछ पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है। विशेष रूप से छोटे गमलों में लगे पौधों की मिट्टी अत्यधिक गीली हो सकती है, जिससे पौधों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में संवेदनशील पौधों को अस्थायी रूप से शेड या सुरक्षित स्थान पर रखना बेस्ट होता है।

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9. कीट नियंत्रण पर ध्यान न देना (Ignoring Pest Control)

कीट नियंत्रण पर ध्यान न देना (Ignoring Pest Control)

मानसून के मौसम में स्लग, घोंघे, एफिड्स और कुछ अन्य कीट ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। कई बार ये नई पत्तियों और कोमल टहनियों को नुकसान पहुंचाते हैं। पौधों की नियमित निगरानी करें और पत्तियों के नीचे भी जांच करें। यदि कीट दिखाई दें, तो उन्हें मैन्युअली हटाया जा सकता है या जरूरत के अनुसार नीम तेल जैसे जैविक उपाय किए जा सकते हैं।

10. गार्डन की सफाई न करना (Poor Garden Maintenance)

मानसून में गिरे हुए पत्ते, टूटे फूल और अन्य जैविक अवशेष जल्दी सड़ने लगते हैं। यदि इन्हें लंबे समय तक गार्डन में पड़ा रहने दिया जाए, तो कीटों और रोगों के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। सप्ताह में कम से कम एक बार गार्डन की सफाई करें। गिरे हुए पत्तों और सड़े हुए हिस्सों को हटा दें। साफ-सुथरा गार्डन पौधों के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करता है।

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मानसून गार्डनिंग में क्या करें और क्या न करें Do’s And Don’ts In Monsoon Gardening In Hindi

बरसात का मौसम पौधों की बढ़वार के लिए अनुकूल होता है, लेकिन इस दौरान की गई कुछ गलतियां पौधों को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि बारिश के मौसम में कौन-से काम करने चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए, ताकि गार्डन स्वस्थ और हरा-भरा बना रहे।

करें (Do’s)

  • पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जांचें।
  • गमलों के ड्रेनेज होल साफ रखें।
  • पौधों की नियमित जांच करें।
  • खरपतवार समय पर हटाएं।
  • जैविक खाद का संतुलित उपयोग करें।
  • खराब पत्तियों की छंटाई करते रहें।

न करें (Don’ts)

  • लगातार गीली मिट्टी में पानी न डालें।
  • गमलों में पानी जमा न होने दें।
  • जरूरत से ज्यादा खाद न डालें।
  • रोगग्रस्त पत्तियों को पौधे पर न छोड़ें।
  • कीटों की समस्या को नजरअंदाज न करें।
  • पौधों को बहुत अधिक पास-पास न लगाएं।

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निष्कर्ष:

मानसून का मौसम गार्डन को हरा-भरा और जीवंत बनाने का शानदार समय होता है, लेकिन इस दौरान की गई छोटी-छोटी गलतियां पौधों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं। जरूरत से ज्यादा पानी देना, जलभराव होने देना, पौधों की जांच न करना और गार्डन की सफाई की अनदेखी करना ऐसी गलतियां हैं, जिनसे आसानी से बचा जा सकता है।

यदि आप इस लेख में बताए गए व्यावहारिक सुझावों को अपनाते हैं, तो आपका गार्डन पूरे मानसून में स्वस्थ, आकर्षक और अच्छी वृद्धि वाला बना रहेगा। नियमित देखभाल और सही निर्णय ही सफल मानसून गार्डनिंग की कुंजी हैं। ऐसे ही उपयोगी गार्डनिंग लेख पढ़ने के लिए organicbazar.net पर विजिट जरूर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या मानसून में पौधों को पानी देना चाहिए?

हाँ, लेकिन केवल तब जब मिट्टी सूखी लगे। यदि मिट्टी पहले से नम है, तो अतिरिक्त पानी देने की जरूरत नहीं होती।

2. मानसून में पौधों में फंगल समस्या क्यों बढ़ती है?

अधिक नमी, लगातार गीली पत्तियां और कम वायु संचार फंगल समस्याओं की संभावना बढ़ा सकते हैं।

3. क्या मानसून में खाद डालनी चाहिए?

हाँ, पौधों को जरूरत के अनुसार सीमित मात्रा में जैविक खाद दी जा सकती है।

4. क्या मानसून में पौधों की छंटाई करनी चाहिए?

हाँ, सूखी, पीली या रोगग्रस्त पत्तियों व शाखाओं को हटाना पौधों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

5. मानसून में कौन-सी खाद सबसे अच्छी रहती है?

वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट खाद और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद अच्छे विकल्प माने जाते हैं।

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